जब क्रोधित हनुमान के लिए ‘श्रीकृष्ण’ को बनना पड़ा ‘श्रीराम’!!!

    हनुमान ने तोड़ा था सत्यभामा, सुदर्शन चक्र और गरुड़ तीनो का घमंड |

    0
    88
    हनुमान ने तोड़ा था सत्यभामा,सुदर्शन चक्र और गरुड़ तीनो का घमंड |
    हनुमान ने तोड़ा था सत्यभामा,सुदर्शन चक्र और गरुड़ तीनो का घमंड |

    दोस्तों आज जो में आप को घटना बताने जा रहा हु वह उस समय के है, जब भगवान श्री कृष्ण को हनुमान के भयानक क्रोध को शांत करने के लिए प्रभु श्री राम का रूप धारण करना पड़ा था| यही नहीं श्री कृष्ण की पत्नी रुक्मणि को भी माँ सीता बनकर हनुमान को अपने दर्शन देने पड़े थे| दरअसल महाभगवत पुराण के अनुसार ये घटना उस समय की जब श्री कृष्ण के भाई बलराम अपने साहस, पत्नी सत्यभामा अपनी खूबसूरती, और कृष्ण जी के वाहन गरुड़ अपने शक्ति में चूर हो गए थे| जब श्री कृष्ण ने ये देखा तो उन्होंने उनके घमड़ को तोड़ने के लिए एक लीला रची, जिसका किसीको भी आभास नहीं था| एक दिन नारदमुनि इन्द्रगी दे सभा में आये उनके समान में वह उपस्थित सभी देवता खड़े हो गए, गरुड़ को छोड़ कर, गरुड़ का यह व्यवहार इन्द्र देव को अच्छा नहीं लगा। उन्होंने इनका कारण जब गरुड़ से पूछा तो गरुड़ ने कहा के में एक शक्ति शाली पक्षी हूँ, और में ऐसे किसीभी साधु के सम्मान में खड़ा नहीं हो सकता, जो केवल इधर से उधर भटक कर दुनिया भर की बातें बनाता हो, यह सुनकर नारदमुनि को गहरा धक्का लगता है|

    अगले ही दिन वह यह बात कृष्णजी को बताने उनके महल पहोच जाते है| जैसे ही श्री कृष्ण ने नारदमुनि को देखा तो वह तुंरत खड़े हो गए और नारदमुनि के चरणों को धोकर उन्हें आदर पूर्वक बिठाया इसके बाद उन्होंने नारदमुनि से अपने देव लोक के बारे में पूछा, तभी नारदजीने कृष्ण को सारी घटना सुना दी| गरुड़ के इस व्यवहार से श्री कृष्णजी ने नारदमुनि से क्षमा मांगी और उनसे कहा की वो कृपा करके सत्यभामा को बुलाये पहले तो नारदमुनी चौंक गये के आखीर सत्यभामा से इससे क्या लेना देना और वो आखिर क्यों बुलाये सत्यभामा को, फिर वह सत्यभामा को बुलाने पहोच जाते है| लेकिन सत्यभामा तो अपने सिंघार में खोई हुई थी| बार बार वह अपने आप को शीशे में निहार रही थी, अपने आभुषण के चमक में उन्हें कुछ भी नजर नहीं आ रहा था| तभी नारदमुनि ने उन्हें आवाज लगाई सुनो सत्यभामा श्री कृष्ण आपको बुला रहे है लेकिन सत्यभामा ने कोई उतर नहीं दिया वो अपने खूबसूरती में ही खोई रही नारदमुनि को फिर एक बार अपमान का घुट पीना पड़ा|

    वह तत्काल श्री कॄष्णजी के पास गए और उन्हें पूरी बात बताई यह सुनकर उन्होंने नारदमुनि से अनुरोध किया की वो जाए और केले के वन में तपस्या कर रहे हनुमान को बुलाये हनुमान का नाम सुनकर नारदमुनि फिर चक्कर में पड़ गए के अब भला हनुमान जी बिच में कहा से आ गए, नारदमुनि श्री कृष्णजी की बात का अनुसरण करते हुए केले के वन में पहोच गए तभी उन्हें तपस्या कर रहे हनुमान नजर आये वो उनके पास गए और कहा है वायु पुत्र आपको कृष्ण बुला रहे है तपस्या में बाधा पड़ते हनुमान को बहुत क्रोध आया परंतु उन्होंने अपने आपको संभाला और फिर से तपस्या में लीन हो गए लेकिन जैसे ही नारदमुनि ने हनुमान से फिर से कहा है वायु पुत्र आपको श्री कृष्ण बुला रहे है| तभी हनुमान ने तुरंत गुस्से में प्र्श्न किया कौन कृष्ण में किसी भी कृष्ण को नहीं जनता और यह कह कर वह पुनः ध्यान मग्न हो गए, तभी नारदमुनि को ध्यान आय की हनुमान तो प्रभु राम के परम भक्त है वो केवल श्री राम की ही पूजा करते है और उन्ही की अज्ञा का पालन करते है राम नाम ही एक दिव्य मंत्र है जो हनुमान से कुछ भी करवा सकता है|

    उसके बाद नारदमुनि राम नाम की धुन गाने लगे राम नाम की धुन सुनकर हनुमान सम्मोहित हो गए और नारदमुनिजी के पीछे पीछे चलने लगे, राम नाम की धुन का सहारा लेकर नारदमुनि हनुमानजी को दवारिका तक ले गए लेकिन वह पहुचकर जैसे ही नारदमुनि ने रामनाम की धुन बंध की हनुमानजी होश में गए जब उन्होंने देखा की वो जंगल में नहीं है बल्कि दूसरी जगह आ पहोंचे है तो उनको बहुत क्रोध आ गया और उन्होंने द्वारिका के बग़ीचे को तहस नहस करना प्रारंभ कर दिया वही दूसरी और बलराम को पता लगा के किसी वानर ने नगर में उत्पाथ मचा रखा है, तो उन्होंने हनुमानजी को पकड़ने के लिए गरुड़जी को भेजा बलराम को तनिक नहीं आभास नहीं था, की गरुड़ जिससे वो लड़ने के लिए भेज रहे है वो कोई साधरण वानर नहीं है, बल्कि स्वयं हनुमान है, हनुमानजी के सामने गरुड़ की शक्ति बहुत तिच्छ थी हनुमान ने पल भर में ही गरुड़ के घमंड को ध्वस्त कर दिया और अब स्वयं बलराम को हनुमान के सामने आना पड़ा उन्हें रोकने के लिए लेकिन हनुमानजी ने बलराम के घमड़ को भी चुटकी ओ में स्वः कर दिया अब ऐसा कोई नहीं था जो हनुमानजी के क्रोध को शांत कर सकता था आखिर में बलरामने श्री कृष्ण को बुलाया, तब श्री कृष्ण ने बलराम को बताया की वो कोई साधरण वानर नहीं है बल्कि हनुमान है और अब तो उन्हें केवल प्रभु श्री राम ही रोक सकते है|

    इसके बाद उन्होंने सत्यभामा को बुलाया और कहा है सत्यभामा सीता बनकर आईये ये सुनकर सत्यभामा वापस चली गई और अपने आभूषण सुंदर वस्त्र बदलकर फटे हुए कपडे धारणकर अपने बाल फैलाकर वापस आई सत्यभामा को लगा शायद श्री कृष्ण उनके वनवास वाली सीता के स्वरूप को देखकर प्रश्न हो जायेगे लेकिन कृष्ण तो उन्हें देखकर हसने लगे और उनसे कहा मेरे पास सीता बनकर आइये सत्यभामा को कुछ भी समझ में नहीं आया और वापस गई और खूबसूरत आभुषण और बढ़िया सी साड़ी पहनकर आ गयी श्री कृष्ण ने उन्हें देखा और जोर जोर से हस्ते हुए उन्हें कहने लगे आपतो सीता की जगह आभूषण की दुकान बनकर आ गई मैंने आपसे सीता बनकर आने को कहा था ये सुनते ही सत्यभामा का घमड़ चूरचूर हो गया इसके बाद श्री कृष्ण ने रुक्मणि को आवाज लगाई और कहा है रुक्मणि सीता बनकर आइये ये सुनते ही रुक्मणि श्री कृष्ण के पास भाव विभूर होकर दौड़ी चली आई और अपने पुत्र जैसे हनुमान के बारे में जानकर उनकी आँखों में आंसू चले आये क्यों की हनुमान उन्हें अपनी माता मानते थे यह देखकर सत्यभामा की आंखे शर्म से नीची हो गई|

    इश्के बाद श्री कृष्ण और रुक्मणि श्री राम और सीता बनकर हनुमान जी के समक्ष गए और जैसे ही हनुमानजी ने श्री राम और माता जानकी को देखा वो बच्चे की तरह रोने लगे और उनके पेरो पर गिर गए श्री राम ने उनसे कहा की मेरे प्रिय हनुमान में तुमसे मिलने आया हूँ में तुम्हारा क्रेता युग वाला राम हूँ, लेकिन द्वारपाल युगमें मैं कृष्ण हूँ और इस समय में तुम्हारे सामने राम और कृष्ण दोनों ही रूप में हूँ ये सुनकर हनुमान प्रभु श्री राम के गले लगकर रोने लगते है|

    हमारी ऐसी ही कथा जानने के लिए आगे देखते रहे|
    जय श्री कृष्ण || जय श्री राम || जय श्री हनुमान

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here